चातुर्मास व्रत २०१६

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चातुर्मास व्रत २०१६ - श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक

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चातुर्मास व्रत का आरम्भ देवशयनी एकादशी से होता है। इस साल इस व्रत का शुभारम्भ १५ जुलाई देवशयनी एकादशी के दिन हो रखा हो। यह व्रत चार महीने चलेगा और इसका समापन ११ नवंबर को एकादशी के दिन होगा। इस व्रत की शुरुआत आषाढ़ मास की एकादशी को ही हो जाती है। इस व्रत में चार महीने श्रावण, भादो(भाद्रपद), आश्विन और कार्तिक को अति पवित्र मन गया है। इन महीनों का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। ज्ञान और ध्यान के लिए ये चार मास (जो चातुर्मास के नाम से प्रशिद्ध हैं) बहुत उपयोगी और साधक के साधना को सफल बनाने वाले बताये गए हैं। सनातन धर्म के विभिन्न व्रत त्यौहार इस चातुर्मास में मनाया जाता है। इन चार महीनो में यात्रा करने का निषेध है। यात्रा का निषेध होने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति के लिए अधिक समय मिल जाता है।

बहुत से लोग इस पवित्र महीनो में सहज उपवास रखते हैं। जैसे दिन में एक या दो भोजन, या महीने के विशेष दिनों में सिर्फ एक वक्त का खाना खाना । चातुर्मास व्रत के लिए कोई कठोर नियम नहीं है। यह साधक पर निर्भर करता है कि वह कैसा उपवास रखना पसंद करता है और किन किन निषेधों का पालन करता है।

बहुत से लोग धार्मिक ग्रन्थ रामायण, गीता, भागवत, उपनिषद या पुराणों को पढ़ने की योजना बनाते हैं। कई अन्य इस पवित्र महीनो में नित्य मदिर जाकर अपने धार्मिक आध्यात्मिक उत्थान का प्रयास करते है। कई मंदिरों में चातुर्मास व्रत का कथा प्रवचन भी होता है। उपनिषद पुराणों की कथाएँ इस माह में सुनाने का विशेष महत्व है।

विष्णु की रात्रि होने के कारण, इन चारों महीनो का भगवान के भक्तों के लिए ख़ास महत्व है। इस पवित्र अवधि में भक्त भगवान् विष्णु के कथा का श्रवण करते हैं तथा मंदिर में सेवा दान करते हैं।

श्रावण महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए बहुत महत्व का है। इस महीने के सोमवार को अत्यधिक शुभ माना जाता है।

chaturmas - sawan

Chaturmas - Sawan

पहले दो महीनो में मानसून शिखर पर होता है। अतः स्वस्थ शरीर को बनाए रखने के लिए चार महीनों के दौरान विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए सावन महीने में लोग साग खाना छोड़ देते हैं।

दही या दही से बने पदार्थ भाद्रपद के महीने में वर्जित है। छांछ या तक्र का निषेध नहीं है। दूध का परहेज अश्विन के महीने में करना चाहिए। दलहन/ दाल कार्तिक माह में वर्जित है।

इन सभी खाद्य पदार्थों का त्याग उस मास के लिए व्रत कहा जाता है। जैसे साग त्याग व्रत, दुग्ध त्याग व्रत, दधी त्याग व्रत और द्विदल त्याग व्रत।

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